***पवन चन्दन***
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केला-व-नींबू की नोकझोक
केला उवाच

रूप सलोना है तू गेंद सा खिलौना है
फिर भी तुझे आदमी के हाथों कत्ल होना है
बीच से वो काटता है जीभ से भी चाटता है
इतना निचोड़ता है बूँद नहीं छोड़ता है
आदमी क्रूर है रहम नहीं खाता है
दर्दनाक अंत तेरा मुझे नहीं भाता है
नींबू उवाच

अपनी नहीं सोचता है कैसा तू जनाब है
मुझ से तो गत ज्यादा तेरी ही ख़राब है
ख़राब सी ख़राब है कहा नहीं जाता है
पूछो मत प्यारेलाल देखा नहीं जाता है
मेरी मौत शान से और तेरी अपमान से
द्रोपदी सा हाल होता तेरा इन्सान से
***पवन चन्दन***